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पर्यावरण संरक्षण के बिना जींवन संकट में।

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वर्तमान जीवन,भविष्य निर्माण, पर्यावरण संतुलन,के बिना सम्भव नही।

भोपाल, आज सारा विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा है,और विश्व पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहा है, लेकिन पर्यावरण को संरक्षित करने का कितना पालन होता है,किसी को बताने की जरूरत शायद नही है, लेकिन आज विश्व पर्यावरण दिवस सारी दुनिया मना रही है, तो अपना देश भारत भी दुनिया की बियदरी से अलग कैसे रह सकता है। देश,से लेकर प्रदेश तक कि सरकारे समाचार पत्र, tv चैनल के अलावा सम्बंधित विभाग कार्यक्रम कर फ़ोटो छपा कर कतरन फाइलों में स्मर्णन के लिए रख लेगे।

अशोक सिंह सेंगर भोंपाल

तूफान से गरीब बे-घर

आज पूरे देश मे बृक्षा रोपड़ का कार्य पूर्व वर्ष की भांति आज भी होगा,और लाखों रुपए का बजट खर्च कर दिया जाएगा, लेकिन कितने पौधे संरक्षित हो पाएंगे, इसकी कोई गारंटी नही है। जब देश मे पर्यावरण संरक्षण में करोड़ों रुपए खर्च किया जाता हैं, तो क्या संरक्षण करना किसका दायित्व है, देश मे 21वी सदी विकाश के नाम पर आद्योगिक इकायो के प्रदूषण जंगलो का कम होना एवं प्रकृतिक मिनरल सम्पदा का नियम विरुद्ध दोहन किया जा रहा है, जिसे प्रदेश की सरकारे रोकने में असफल है, कारण स्पष्ट है,कि प्रकृतिक सम्पदा का दोहन करने बालो का सरकारो पर सीधा दखल रहता है,उदारण स्वरूप रेड्डी बंधुओ को देश मे कौन नही जानता, जिनका सरकार पर सीधा दखल रहता है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में लोग सरकार के संरक्षण में पल फूल रहे है। साल 20,20 की केबल प्रकृतिक आपदा की बात करे तो, मुख्य रूप से मौषम ऋतु के समांतर न होना, वेमौषम वातावरण में परिवर्तन, बुहान का कोरोना, पश्चिम बंगाल का चक्रवाती तूफान अम्फन, दूसरा एक दिन पूर्व का मुबंई चक्रवाती तूफान निसर्ग, जिसका असर देश के विभिन्न क्षेत्रों आज भी दिख रहा है। और इसी प्रकार देश के अन्य घटना क्रम शामिल है।मनुष्य अपने धर्म को छोड़ किसी को प्रभावित करने से नही छोड़ रहा, जहाँ केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकली,उसे नागरिको ने पटाख़ों से भरा अनन्नास खिला दिया, खाने से पटाख़े उसके मुँह में फट गया, जिससे उसकी मुख और जीभ बुरी तरह से छतिग्रस्त हो गई, मादा हाथी गर्भ धारण किये हुए थी।
घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। उसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुचाई किसी का घर नहीं तोड़ी। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँची, मुँह में जो आग उसे महसूस हो रही थी,उसे बुझाने का पानी का सहारा सही रहा होगा,और नदी में तीन दिन बाद दम तोड़ दी।
यह घटना बताती है,कि मनुष्य मिनरल के अलावा वन्य प्राणियों को समाप्त करने में लगा है, जिस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ता चला जा रहा है,अब जिसका प्रकोप दिखने लगा है। जब जींवन ही सुरक्षित नही रहेगा, तो विकाश का क्या होगा, पूरी दुनिया कि, कोरोना की मार से कमर टूट चुकी है, दुनिया भर में जहाँ लाखों लोगों की जान जा चुकी है, वही लाखों लोगों का जींवन संकट में है। लोगो के मन मे भय व्यप्त है,की जींवन कितने दिनों का है। लेकिन पर्यावरण संतुलन के विषय मे लोगो का रुझान नके बराबर है। जिसका असर देखने को मिल रहा है। जैसे पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ से लाखो लोग प्रभावित हुए, केंद्र सरकार क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर राज्य को तत्काल राहत कार्यों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी।इसी प्रकार मुंबई, कोरोना कैपिटल बन रही, मुंबई के दक्षिण हिस्से को छूते हुए चक्रवाती तूफान निसर्ग गुजर गया।
मुंबई के कई इलाकों में भारी बारिश हुई, हवाओं की रफ्तार 100 किमी प्रतिघंटा से ऊपर पहुंच गई। सीसीआई नरीमन प्वाइंट, कफ परेड, कांदिवली (पश्चिम), नागपाड़ा, भायखला और कालाचौकी जैसे कुछ इलाकों में पेड़ उखड़े, घरों की छत उड़ गई। और 6 लोगो को जान गवानी पड़ी।
अब प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा, जिसका प्रभाव आम जन जीवन मे स्पष्ट दिख रहा है। 20,20 के विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हुए आज संकल्प लेना चाहिए कि पर्यावरण संरक्षित करने लिए कानून के दायरे में रहते हुए, हर उचित कदम उठाएंगे, साथ ही पूर्ण रूप से सरकार का सहयोग करेंगे।

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